जोबन ज्वर में मत भरमा मेरे भाई रे।
माया, मोह, मद, ममता, ये सब दु:खदाई रे।।
जोबन ज्वर…..
तेरी दो दिन की है जिन्दगानी, क्षणभर को चढ़ी है तेरी जवानी।
मत वासना में उलझाई रे।।
जोबन ज्वर…..
भोगवासना का ले ले स्वाद, तूने तन तेरा कर लिया बर्बाद।
बिरथा चिन्ता ली बढ़ाई रे।।
जोबन ज्वर…..
प्रभु का तू ने सुमिरण किया नहीं, गुरु चरणों में तूने प्रीत लगाई नहीं
अब तो चेत बिरथा पछताई रे।।
जोबन ज्वर…..
नियम संयम को अब भी अपनाले, गुरु के चरणों में श्रद्धा भाव जगा ले
तेरी बिगड़ी सब बन जाई रे।।
जोबन ज्वर…..
जोबन ज्वर से जो बच पाया, वो ही जीवन में परमसुख पाया।
अवधूत देवीदास ने लक्ष्मी को बचाई रे।।
जोबन ज्वर…..