सत्संग की महिमा सबने गाई रे।
चार पदारथ जिसने भी पाए, सबने सत्संग से पाई रे।।
सत्संग की महिमा…..
जिसने भी सुयश पाया जग में, सत्संग सू ही वाकू मिलाई रे।।
बहुत जतन करें लोग जगत में, बिनु सत्संग नहिं सुफल पाई रे।।
सत्संग की महिमा…..
लोक वेद सब बताते, बिनु सत्संग सदगति नहिं मिलाई रे।
बिनु सत्संग विवेक नहिं होता, किसी को सत्संग ही आनन्द बरसाई रे।।
सत्संग की महिमा…..
सत्संग से सठता मिट जाती, हियँ दिव्य ज्ञान उपजाई रे।।
अवधूत देवीदास के प्रताप से, लक्ष्मीनारायण सत्संग पाई रे।।
सत्संग की महिमा…..