सत्संग की महिमा अपरम्पारी रे, काक होय कोकिल, सब सन्त पुकारी रे।।
मन की कल्मष मिट जाती, मिट जाती सब तन की बीमारी रे।।
सत्संग की महिमा…..
मन को शान्ति मिल जाती सत्संग से, हृदय उठे उमंग अपारी रे।।
शब्द की चोट पड़े हृदय पर, सहज खुल जाए दिल की किवाड़ी रे।।
सत्संग की महिमा…..
प्रारब्ध का जाल सब कट जाता, माया विपद जाय सब टारी रे।।
सत्संग से जय रूप यश वैभव मिलता, मिलते सहज पदारथ चारी रे।।
सत्संग की महिमा…..
कहत लक्ष्मी सुनो रे बन्धु, सत्संग कराए भव पारी रे।।
सत्संग की महिमा…..