घट का पट खोल बन्धु, राम मिल जावे रे।
गुरु के चरणों में ध्यान लगावो, तम का अन्धकार मिटावे रे।
श्रद्धा-विश्वास रखो चरणों में, गुरु की कृपा मिल जावे रे।।
घट का पट…..
भावों का सब जाल कटेगा, गुरु भव पार करावे रे।।
ज्यों-ज्यों श्रद्धा बढ़ेगी गुरु चरणों में, त्यों-त्यों आनन्द बरसावे रे।।
घट का पट…..
सत का होगा प्रकाश हृदय में, माया विकार सब मिट जावे रे।।
माया के विकार जब मिट जायेंगे, तब राम ही शेष बच जावे रे।।
घट का पट…..
अवधूत देवीदास के प्रताप से, लक्ष्मीनारायण अनुभव गावे रे।।
घट का पट…..