हे सतगुरु तेरे चरणों में बढ़े अनुराग मेरा।
मेरी बस यही चाह है मिलता रहे अनुग्रह तेरा।।
तू ने ही मुझे बचाया जब जब विपदा ने घेरा।
मेरी विनती सुनले सतगुरु मैं हूँ तेरा चेरा।।
भगति मुझको देे दे सतगुरु मिटा दे जग का फेरा।
माया नटनी नाच नचाए जग में मारे भटभेरा।।
तेरी शरण में ही सुख मिलता मुझे है सहारा तेरा।।
लक्ष्मीनारायण शरण में आता दिल में भरोसा घनेरा।।