सियाराममय सब जग जानो मेरे भाई।
सिया है श्वास तुम्हारी, रमता राम सब घट मांई।।
एक ही ऊर्जा सब घट व्याप रही, ब्रह्म अखण्ड एक सुहाई।।
सियाराममय सब जग…..
प्रेम की भावना सबसे रखना, प्रसन्न होंगे जगत गुसांई।।
राम है बल ऊर्जा का, सिया बल की शक्ति सुहाई।।
सियाराममय सब जग…..
प्राण का बल अरु प्राण की शक्ति, सब घट में ही रही रमाई।।
मर्म जानलो प्राण ऊर्जा का, सब घट में ही सियाराम लखाई।।
सियाराममय सब जग…..
नित ध्यान करो सतगुरु चरणों का, घट में ही सब समझ पराई।।
अवधूत देवीदास के प्रताप से लक्ष्मीनारायण अनुभव पाई।।
सियाराममय सब जग…..