कुसंग से बचना कुसंग बड़ी दु:खदाई रे।
गुण-दोष सकल जगत में व्याप रहे एक समान।
विधि है मूल गुण-अवगुण का कहते वेद-पुराण।।
विधि तो भाव से बनाई रे।।
कुसंग से बचना…..
संगत जैसी रंगत भाव की सब लोग बताते।
कुसंग से होती हानि ऋषि-मुनि सब गाते।।
सुसंग सदा सुखदाई रे।।
कुसंग से बचना…..
काम-क्रोध मद, लोभ सब दु:ख के दाता।
कुसंग मिलै माया विकार अरु बढ़ जाता।।
नित नव चिन्ता उपजाई रे।।
कुसंग से बचना…..
सुसंग से सुमति मिले सुमति आनन्ददाई।।
कुसंग से कुमति बढ़ै कुमति दु:खदाई।।
सुमति से सुगति मिल जाई रे।।
कुसंग से बचना…..
कहत लक्ष्मी सुनो रे बन्धु, कुसंग तजो जो चाहो भलाई।।
सुसंग में आनन्द वरसेगा, निज अनुभव गाई रे।।
कुसंग से बचना…..