सत्संग करलो मेरे भाई रे, सठता मिट जाती सत्संग पाई रे।।
सत्संग की महिमा अपार है, निगम पुराण सब गाई रे।।
सत्संग करलो…..
कुमति का जाल सब कट जाता, सुमति बेल नित्य लहलाई रे।।
सत्संग से सोवत भाग्य जग जाते, हृदय में भगति बीज उगाई रे।।
सत्संग करलो…..
काम, क्रोध की सब तप्त मिट जाती, नित नव आनन्द उमगाई रे।।
सत्संग से सतगुरु प्रसन्न होते, सहज कृपा देते बरसाई रे।।
सत्संग करलो…..
कहत लक्ष्मी सुनो रे बन्धु, सत्संग की महिमा अपार सुहाई रे।।
सत्संग करलो…..