एक दिन जग से सबको, जाना है रे भाईे।।
ऋषि-मुनि बहुत हुए तपसी, कोउ न काया रख पाई।।
एक दिन जग…..
राजा महाराजा सब चल गए, चले गए राम रघुराई।
कृष्ण जैसे योगी चल गए, वाकी भी नहीं वश चलाई।।
एक दिन जग…..
गोरख जैसे जति चला गया, जाने काया खूब तपाई।।
बुद्ध, महावीर जैसे सिद्ध चले गए, काया नहिं उनकी बच पाई।।
एक दिन जग…..
कबीर जैसा ज्ञानी चला गया, जाने तीन लोक की बात बताई।।
नानक जैसा सन्त चला गया, जाने सतनाम ओंकार बताई।
एक दिन जग…..
ब्रह्मा, विष्णु, महेश चले गए, पुराणन्ह में जिनका यश गाई।।
देवीदास जैसे अवधूत, चला गया, जिसने काया संग खूब करी लड़ाई।।
एक दिन जग…..
लक्ष्मीनारायण अब मरम बता रहा, काया काऊ की ना रह पाई।।
एक दिन जग…..