ओ बन्धु सुख का सब सार बताऊँ।
मत भटको बिरथा जग में, दिल में ही राह दिखाऊँ।
ओ बन्धु…..
जो कर्ता सोई भोगता जगमें, तुमको सत्य बात बताऊँ।।
भगति पथ पर सदा सुख मिलता, भगति ही सब सुख की ठाऊँ।।
ओ बन्धु…..
निर्मल भाव होते भगति के आधार, सब मरम खोल बताऊँ।।
सतगुरु शरण भाव निर्मल कराती, कृपा सतगुरु की पल-पल चाऊँ।।
ओ बन्धु…..
अवधूत देवीदास के प्रताप से, लक्ष्मीनारायण सब सुख पाया।।
अब मैं अनुभव गाऊँ।।
ओ बन्धु…..