ओ मनवा तू करले भजन सतगुरु का, तेरा कट जायेगा सब भव फन्दा।
माया नागिन पल-पल तड़पावै, मोह में बना दिया तुझको अन्धा।।
ओ मनवा तू…..
मोह से कभी किसी को सुख नहिं मिलता, मोहवश मत कर तू काम गन्दा।।
मन्दिर-मस्जिद में तू मत भटकावै, ये सब धर्म के नाम का धन्धा।।
ओ मनवा तू…..
अन्त:करण को तू निर्मल करले, पल-पल मिलेगा तुझे आनन्दा।।
पाखण्ड छोड़ जिसने भजन किया सतगुरु का, वो अधिकारी मुक्ति का बन्दा।।
ओ मनवा तू…..
लक्ष्मीनारायण ने शरण लेली सतगुरु की, अब नित पावे आनन्दा।।
ओ मनवा तू…..