कपट तजि कर्म करो, सुधरेगें सब काम रे।।
बन कन्दरा में क्या ढूँढते हो, सुकृत करो मिल जायेंगे राम रे।।
कपट तजि कर्म…..
निर्मल मन में राम प्रगटेगें, निर्मल मन ही सुख का धाम रे।।
भजन भावना जब होगी मन में, तब ही मिलेगा विश्राम रे।।
कपट तजि कर्म…..
कपट करोगे कपट ही मिलेगा, यही तो है विधि का विधान रे।।
कपट भावना कल्मष बढ़ाती मन की, कलुषित मन बिगाड़े सब काम रे।।
कपट तजि कर्म…..
मन की भावना से सुख दु:ख मिलता, मूर्ख देते दोष विधाता बाम रे।।
कहत लक्ष्मी सुनो रे बन्धु, निर्मल करो मन को सुधारो काम रे।।
कपट तजि कर्म…..