गुरुजी पधारो म्हारे हृदयरा देश, माता-पिता की सेवा करूँगी।
सास-ससुर की सेवा करूँगी, नहिं रखूँगी मन में द्वेष।।
गुरुजी पधारो म्हारे…..
दया-दान करुणा का भाव रखूँगी, मद, लोभ, मोह सब भाव तजूँगी।
नहिं करूँगी कभी क्लेश।।
गुरुजी पधारो म्हारे…..
प्रेम भावना मन में रखूँगी, नियम संयम के पथ चलूँगी।
नहिं करूँगी माँग विशेष।।
थारा चरणा में सुरता लगाऊँगी, थाने मैं म्हारा दिल में बिठाऊँगी।
जल्दी पधारो गुरुजी परमेश।।
गुरुजी पधारो म्हारे…..
लक्ष्मीनारायण ने अर्जी लगाई, थारा चरणा में प्रीत बढ़ाई।
अब करो नहिं देरी निमेष।।
गुरुजी पधारो म्हारे…..