ओ मन मत खोवे भजन का मौका रे, धन-दौलत से सुख नहिं मिलता,
ये सब जग का धोखा रे।।
ओ मन मत…..
भजन भाव से सुख मिलता, भजन से ही मिटता सब शोका रे।।
विषय रस में वो डूबे जग में, जो नहिं अपने मन को रोका रे।।
ओ मन मत…..
सतगुरु चरणों में लगन लगाले, मनवा ये जगत सब थोथा रे।।
खाली हाथ एक दिन जाना पड़ेगा, करले भजन मत बनि जगत में बोका रे।।
ओ मन मत…..
लक्ष्मीनारायण सतगुरु शरण में, नित नव लेवे आनन्द का झोका रे।।
ओ मन मत…..