चिन्ता मत कर रे मनवा, लिखा-लिखा सब होय।।
पाछे जो तू ने लिखा भाव से, वो ही भोग रहा फल सोय।।
चिन्ता मत कर…..
भावों की लेखनी है तेरे हाथों में, लिख ले तू जो चाहे सोय।।
आज जो तू लिखेगा भाव पटल पर, वा को कल फल मिलेगो तोय।।
चिन्ता मत कर…..
तू बिरथा परदोष न लगा जगत पर, तेरे भाव में ही सुख दु:ख लुकोय।।
भावो से भावों का लिखा मिटाले, सुख ही सुख बरसेगा तोय।।
चिन्ता मत कर…..
कहत लक्ष्मी सुन रे मनवा, भाव से ही भावी तैरी होय।।
चिन्ता मत कर…..