सतगुरु ले ले अपनी शरण में, मैं दौड़ा-दौड़ा आया हूँ।।
मेरे घट की तू जाने सारी बतिया, मैं स्वार्थ के कारण आया हूँ।।
सतगुरु ले ले…..
जगत ने मुझे बहुत सताया है, अब मैं शान्ति पाने आया हूँ।।
मोह के जाल फँसा मैं सतगुरु, अब मोह का जाल कटाने आया हूँ।।
सतगुरु ले ले…..
माया दे रही मुझको दु:ख भारी, मैं माया से मुक्ति पाने आया हूँ।।
भगति भाव नहिं है मेरे मन में, मैं तो तेरी करुणा माँगने आया हूँ।।
सतगुरु ले ले…..
विषय भोग की चाह नहिं मेरे मन में, मैं तो परमपद माँगने आया हूँ।
कहत लक्ष्मी सुनो रे सतगुरु, मैं तो सब तजि तेरी शरण में आया हूँ।।
सतगुरु ले ले…..