नारी को अग्नि में जलाकर, कब तक तुम होली मनावोगे।।
नारी को तुमने चिता में जलाई, बनाकर सती महिमा तुमने गाई।।
कब तक ये बात छुपावोगे।
नारी को अग्नि…..
दे देकर हवाला शास्त्र का, तुमने दमन किया नारी का।।
कब तक नारी का शोषण करावोगे।
नारी को अग्नि…..
सीता जैसी नारी को भी तुमने तजा था, मीरा जैसी भगत को भी तुमने मारा था।
कब तक तुम नारी को तड़पावोगे।।
नारी को अग्नि…..
भोग की वस्तु नारी को तुमने बनाया, दहेज के दानव को भी उसको बलि चढ़ाया।
अब कब तक तुम नारी को मरवावोगे।।
नारी को अग्नि…..
नहीं दिया तुमने सम्मान नारी के त्याग बलिदान को, कभी नहिं होने दिया पूरा नारी के अरमान को
अब कब तक नारी को बन्दी बनावोगे।
नारी को अग्नि…..
उठो जागो अब दो नारी को सम्मान, लक्ष्मी तभी होगा मानवता का कल्याण।।
जब तुम नारी को मान दिलावोगे।।
नारी को अग्नि…..