विषय-वासना का जब चला चटका, तब तब मन मेरा मन्दिर-मस्जिद में भटका।।
जब काम की उठी तरंग, बिकल हुआ मेरा मन कुरंग,
लगा मुझे जोर का झटका।।
विषय-वासना…..
विषय रस ने जप तप भूला दिया, मुझे भावों के सागर में फँसा दिया,
बीच भँवर में मैं अटका।।
विषय-वासना…..
चिन्ता ने जब मुझे जलाया, तब मुझे याद गुरु मेरा आया,
मैंने उनके चरणों में सिर पटका।।
विषय-वासना…..
गुरु ने मुझे बार-बार माफ किया, करि कृपा मन मेरा साफ किया,
गुरु ने दिया ज्ञान का फटका।।
विषय-वासना…..
कहत लक्ष्मी सुनो रे बन्धु, गुरु मेरे हैं कृपा के सिन्धु,
गुरु ने फोड़ दिया भ्रम का मटका।।
विषय-वासना…..