हे गुरुदेव क्षमा करो मुझको, मैं आया हूँ शरण तुम्हारी।।
मैं जग में घोर पातकी, मो सम नहिं कोई विकारी।।
हे गुरुदेव क्षमा…..
काम का चिन्तन मेरे मन में चलता, मुझे लगती नारी बहुत प्यारी।।
यम नियम मुझसे नहिं होता, विषयन का चिन्तन चलता भारी।।
हे गुरुदेव क्षमा…..
भजन भाव में मन लगता नहिं, अब मैं तो नतमस्तक तेरे आगाड़ी।।
हे नाथ अब तू ही रक्षा कर मेरी, तू ही गुरुदेव मेरा सच्चा हितकारी।।
हे गुरुदेव क्षमा…..
लक्ष्मीनारायण हार थका सब भाँती, अब गुरुदेव लेलो शरण तिहारी।।
हे गुरुदेव क्षमा…..