भजन बिनु जग में सुख नाई, ओ सुनो सब लोग लुगाई।।
सुख दु:ख तो आती-जाती छायाँ, भजन तो चढ़ती छायाँ सदाई।।
भजन बिनु…..
विषय सुख पलट दु:ख देते जग में, भजन ही तो है जो सदा सुख बरसाई।।
जग की धन दौलत यहीं रह जाती, भजन की दौलत सदा संग जाई।।
भजन बिनु…..
विषय जाल में जीव दु:ख पाता, भजनभाव से सदा हरषाई।।
काँच किरीच हैं विषयन के सुख, भजन है हीरा अमोलक भाई।।
भजन बिनु…..
ऋषि-मुनि जन सब सन्त बताते, काँच किरीच तजि हीरा लेलो भाई।।
कहत लक्ष्मी सुनो रे बन्धु, करो भजन परम सुख पाई।।
भजन बिनु…..