अरे होता वही जो राम ने रच दिया भाई रे।।
प्राण है राम तुम्हारा, काहे बाहिर भरमाई रे।।
होता वही…..
प्राण से भाव पैदा होते, भाव ही कर्म करवाई रे।।
सुख-दु:ख का अरु न कोई दाता, खुद के भाव सुख-दु:ख दिलाई रे।
होता वही…..
व्यष्टि का राम समष्टि से जुड़ता,राम ही विधि का विधान चलाई रे।।
जो रच दिया राम (प्राण) ने, वाको कोई मेट न पाई रे।।
होता वही…..
कहत लक्ष्मीनारायण सुनो रे बन्धु, राम ही सब सृष्टि चलाई रे।।
होता वही…..