मेरे सतगुरु की सब करणी अलौकिक भाई रे।
बिनु पद के चले सतगुरु मेरा, मुख बिनु सब किछु खाई रे।।
मेरे सतगुरु की…..
बिनु अँखिया सतगुरु देखे मेरा, बाते किछु सकै नहिं छुपाई रे।।
बिनु सतगुरु पत्ता नहिं हिलता जगत में, सतगुरु की सब लीला सुहाई रे।।
मेरे सतगुरु की…..
बिनु वाणी के सतगुरु सब बोले, कोई विरला सकै समझाई रे।।
सतगुरु मेरे सहज दयालु करुणा सिन्धु, सब पर सतगुरु कृपा बरसाई रे।।
मेरे सतगुरु की…..
कहत लक्ष्मी सुनो रे बन्धु, सतगुरु की करणी सतगुरु ही समझाई रे।
मेरे सतगुरु की…..