ओ हंसा चलो रे सतगुरु के देश।
माया ठगनी वहाँ नहि रहती, वहाँ व्यापै नहिं कोई क्लेश।।
ओ हंसा चलो…..
निर्मल जल है सतगुरु के सरोवर का, वहाँ बरसे गुरु की कृपा विशेष।।
भगति के वहाँ मोती चुगना, पाना आनन्द हर निमेष।।
ओ हंसा चलो…..
काल का वहाँ नहिं भय सतावै, हंसा निर्भय रहना हमेश।।
हर पल वहाँ आनन्द बरसता, सुख का नहिं वहाँ कोई शेष।।
ओ हंसा चलो…..
परम विश्राम मिलेगा हंसा, चिन्ता नहिं सतावे लवलेश।।
कहत लक्ष्मी सुनो रे हँसा, जल्दी चलो यह हमारा अनुभव का संदेश।।
ओ हंसा चलो…..