हे सतगुरु मेरे बन्धन खोल, मैं तो हार थका इत-उत डोल।।
सतगुरु मैं तेरी शरण में आ गया, अब तो मेरा मोह का बन्धन तोड़।।
हे सतगुरु…..
तू मेरा कर्तापन का अभिमान मिटादे, सतगुरु तू चाहे वो मुझसे करा दे।।
अब तो सतगुरु तू मुख से बोल, मुझे तेरी चरणों का दास बना ले।।
हे सतगुरु…..
मुझे तेरी करुणा में नहलाले, हे सतगुरु अब मुझसे मुख ना मोड़।।
कहत लक्ष्मी सुनो रे सतगुरु, मैं तेरा सदा पूर्ण भरोसा करूँ।
अब तो तू मुझसे बोल।।
हे सतगुरु…..