मन दर्पण में देखले मुखड़ा अपना रे।।
भावों के कारण भल मंद जगत में, जगत हैं भावों का सपना रे।।
मन दर्पण में….
भावों की धूल जमी हैं मन दर्पण पर, भावों को निर्मल करना रे।।
खुद के भावों को खुद समझना, बाहिर मत भरमना रे।।
मन दर्पण में….
सुरता को गुरु चरणों में लगाना, सतगुरु को दिल में रखना रे।।
मन दर्पण हो जायेगा निर्मल तेरा, हरषि-हरषि सतगुरु गुण गाना रे।।
मन दर्पण में….
खुद ही खुद को दिखेगा मन दर्पण में, लक्ष्मीनारायण का यह कहना रे।।
मन दर्पण में….