श्वासों में तेरे राम बसै, बाहिर कहाँ ढूँढे रे बावरे।।
पाथर की जिसने मूरत बनाई, उसने कहाँ देखी वाकी परछाई।।
जरा करो मन में विचार रे।।
श्वासों में तेरे…..
मन में कर-करके कल्पना, पाथर में करे प्राण की थरपना।।
पाखण्ड की करदी हद पार रे।।
श्वासों में तेरे…..
पाथर तो मुख ले बोलत नाई, बकरा काट जीव हत्या कराई
कैसे होगा खुश राम रे।।
श्वासों में तेरे…..
राम है सबका स्वामी, घट-घट वासी वो अन्तर्यामी, राम देखे तेरे सब काम रे।।
श्वासों में तेरे…..
तेरे भावों की गति वो लख लेता, भाव कर्म का वो सब फल देता
तेरे घट में ही उसको निहार रे।।
श्वासों में तेरे…..
पाखण्ड तजि घट में खोज लगालो, खुद के राम से खुद को मिलालो
लक्ष्मीनारायण का कहना मान रे।।
श्वासों में तेरे…..