सतगुरु ने मारा ज्ञान का झटका, मेरे अहंकार का फूट गया मटका।।
सतपथ की मोहे राह दिखादी, मैं तो विषयन में था भटका।।
सतगुरु ने मारा…..
नियम संयम की मोहे घुट्टी पीला दी, मेरा भ्रम का मेट दिया खटका।।
सतगुरु ने अपनी शरण में ले लिया, मैं तो था जगत में अटका।।
सतगुरु ने मारा…..
भगति का मोते बाग लगवा दिया, करुणा का मार दिया फटका।।
जन्म-जन्म का बंधन कटवा दिया, मेरे सतगुरु का गजब लटका।।
सतगुरु ने मारा…..
कहत लक्ष्मी सुनो रे बन्धु, सतगुरु शरण में आनन्द टपका।।
सतगुरु ने मारा…..