ओ चल मन भँवरा, तोहे गुरु दरस कराऊँ।।
अजर-अमर अविनाशी, पद कमल गुरु के चल, तोहि रस पान कराऊँ।।
ओ चल मन…..
अलख निरञ्जन हैं सतगुरु मेरे, चल तोहि सब मरम लखवाऊँ।।
सतगुरु हैं दया के सागर, चल मन तोहि दया, दान करवाऊँ।।
ओ चल मन…..
सतगुरु हैं सब सुख के दाता, चल मन तोहिं सुख भोग करवाऊँ।।
सतगुरु हैं मुक्ति के दाता, चल मन तोहिं मुक्ति दिलवाऊँ।।
ओ चल मन…..
सतगुरु हैं छाँव शीतलता की, चल मन तोहिं शान्ति मिलवाऊँ।।
कहत लक्ष्मी सुन रे मनवा, चल तोहिं परमपद दिलवाऊँ।।
ओ चल मन…..